प्राचीन एवं पूर्व मध्यकालीन भारत का इतिहास Pracheen Evam Poorva Madhyakaleen Bharat ka Itihas (Ancient and Early Medieval History of India) by डॉ. हरीश कुमार, डॉ. राजेश कुमार शर्मा एवं डॉ. कमलेश कुमार

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यह पुस्तक भारतीय इतिहास के प्राचीन और पूर्व मध्यकालीन कालखंड का एक विस्तृत, व्यवस्थित और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें भारत की सभ्यता और संस्कृति के प्रारंभिक विकास से लेकर मध्यकाल के पूर्व तक के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों को क्रमबद्ध रूप में समझाया गया है। लेखकगण ने इस ग्रंथ के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि भारतीय इतिहास केवल राजवंशों और युद्धों की कथा नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति, धर्म और विचारों के निरंतर विकास की एक जीवंत प्रक्रिया है।

इस पुस्तक की प्रमुख विशेषता इसका संतुलित और समग्र दृष्टिकोण है, जिसमें इतिहास को केवल घटनाओं के क्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुआयामी प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक काल, महाजनपदों का उदय, मौर्य और गुप्त साम्राज्य, तथा विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के विकास का गहन विश्लेषण किया गया है। साथ ही, पूर्व मध्यकालीन भारत में राजनीतिक संरचना, सामंतवाद की प्रवृत्तियाँ, भूमि अनुदान प्रणाली तथा क्षेत्रीय राज्यों के उद्भव को भी विस्तारपूर्वक समझाया गया है।

पुस्तक में सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे वर्ण व्यवस्था, जाति प्रथा, परिवार और स्त्री की स्थिति, शिक्षा और साहित्य का विकास, तथा धर्म और दर्शन की विविध धाराएँ। बौद्ध और जैन धर्म के उदय से लेकर भक्ति आंदोलन के प्रारंभिक स्वरूप तक की चर्चा इस प्रकार की गई है कि पाठक को भारतीय समाज के वैचारिक और आध्यात्मिक विकास की स्पष्ट समझ प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, कला, स्थापत्य, मूर्तिकला और साहित्य के क्षेत्र में हुई प्रगति को भी उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया गया है।

इस ग्रंथ में आर्थिक जीवन—जैसे कृषि, व्यापार, शिल्प और नगरीकरण—के विकास को भी समुचित महत्व दिया गया है। लेखकगण ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि आर्थिक संरचनाओं में हुए परिवर्तन किस प्रकार सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार यह पुस्तक इतिहास के विभिन्न आयामों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक समग्र और गहन दृष्टिकोण प्रदान करती है।

भाषा की दृष्टि से यह पुस्तक सरल, स्पष्ट और विद्यार्थी-हितैषी है, जिससे यह स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। जटिल ऐतिहासिक तथ्यों और अवधारणाओं को भी सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक उन्हें आसानी से समझ सके और अपने अध्ययन में प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।

अंततः, “प्राचीन एवं पूर्व मध्यकालीन भारत का इतिहास” एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय ग्रंथ है, जो भारतीय इतिहास की जड़ों को समझने और उसके विकासक्रम का समग्र विश्लेषण करने में सहायक है। यह पुस्तक न केवल अतीत की घटनाओं को स्पष्ट करती है, बल्कि वर्तमान समाज को समझने के लिए भी एक ठोस ऐतिहासिक आधार प्रदान करती है, जिससे यह इतिहास के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक अनिवार्य अध्ययन सामग्री के रूप में स्थापित होती है।

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